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Friday, December 24, 2021

राज्य का उत्थान हमारे लिए सर्वोपरि, नए साल में मिल कर करे काम : बाबूलाल मरांडी

 




लेख : बाबूलाल मरांडी
(पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता विधायक दल, भाजपा, झारखंड)
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2021 के अनुभवों के साथ हम 2022 में प्रवेश कर रहे हैं। कोरोना के वैश्विक चुनौतियों और उन चुनौतियों से लड़ते हुए 135 करोड़ टीकाकरण की उपलब्धियों के साथ ही हमने अपने संकल्पों को और प्रबल किया है। निश्चय ही कोरोना के दूसरे लहर ने हमारे कई अपनों को हमसे छीन लिया, उनकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन जीवन हमें नित्य आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य व राष्ट्रीय पटल के साथ साथ यह वर्ष झारखंड के लिए भी चुनौतियों का वर्ष रहा है। एक ओर कोरोना के कारण अन्य राज्यों से श्रमिकों का वापस राज्य लौटना और राज्य में नौकरियों की कमी ने श्रमसाध्य लोगों और युवा बेरोजगारों को काफी निराश किया है। राज्य सरकार के द्वारा 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित करने के झूठे वादे और नौकरियां मिलने के बजाय उल्टे नौकरियां खोने से आज राज्य विकास के पायदान चढ़ने के बजाय उल्टी दिशा में जा रहा है।

राज्य में युवाओं को नौकरी नहीं मिलना केवल राजनैतिक विरोधाभाष का विषय ही नहीं है। बल्कि प्रतिस्पर्द्धा के दौर में खुद के पिछड़ने के चिंतन का विषय है। आज राज्य के युवा अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन को विवश हैं। पढ़े-लिखे युवा अथक मेहनत से खुद को प्रतियोगिता परीक्षा के लिए तैयार करते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश परीक्षा के प्रारंभिक दौर से ही भ्रष्टाचार के मकड़जाल में उलझ कर प्रतिभा की हत्या हो जाती है।

राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी ने राज्य में अवसरों की संभावनाओं को संकुचित करके रख दिया है। 2021 में जहाँ राज्य सरकार ने बंपर नौकरियों का जो सपना दिखाया था, वो दिवास्वप्न मात्र ही सिद्ध हुआ है। अब प्रश्न है कि राज्य सरकार जिन मुद्दों को लेकर सत्ता में आयी थी, उन मुद्दों से क्यों भाग रही है? 2021 में सरकार की ऐसी क्या उपब्धि रही है, जिसे लेकर वो खुद की पीठ थपथपा रही है। यह प्रश्न मात्र विपक्ष में होने के नाते नहीं, बल्कि एक साधारण झारखंडी होने के नाते आज हर कोई पूछ रहा है।

2021 का वर्ष राज्य में अपराधियों और भ्रष्टाचारियों के लिए काफी फलदायक रहा है। हत्या, बलात्कार और लूटपाट की बढ़ती घटनाओं से तो लगता ही नहीं कि लॉ एंड ऑर्डर नाम की कोई चीज है राज्य में। निर्ममता से महिलाओं के साथ दुष्कर्म और उसके बाद हत्या की कई घटनाओं ने राज्य को शर्मसार किया और उससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि कोई इसके विरोध में आवाज उठाए तो उसे उपद्रवी बताकर जेल भेज देने का राजनैतिक षडयंत्र।

एक ओर उच्चस्थ पदाधिकारियों और सरकार के संरक्षण में बालू, पत्थर और खनिजों का अवैध कारोबार तो पेयजल स्वच्छता विभाग में बिना काम के ही अपने सगे संबंधियों के खाते में करोड़ों का भुगतान। कुल मिलाकर यह वर्ष राज्य सरकार और सत्तासीनों के लिए तो सुखद रहा है, लेकिन एक आम झारखंडी के लिए यह वर्ष केसी बुरे दौर से कम नहीं।

अब देखना है, कि नए वर्ष में में सरकार राज्यहित में क्या कदम उठाती है? बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर कितनी ईमानदारी से प्रयास करती है।
अब संघर्ष के साथ दृढ़ संकल्प की भी आवश्यकता है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता राज्य के सम्यक विकास के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। सरकार चाहे कितने भी केस मुकदमों से डराने की कोशिश करें, लेकिन भाजपा के कार्यकर्ता जनहित के मुद्दों को लेकर सदन से सड़क तक लोगों की आवाज बनती रहेगी।

आशा है हम पुराने अनुभवों से सीखते हुए नए साल में आगे बढ़ेंगे और अपने राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे। एक सकारात्मक विपक्ष के नाते राज्य और राज्यवासियों का उत्थान हमारे लिए सर्वोपरि है, हम इससे कोई समझौता नहीं कर सकते।
पुनः सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, यह वर्ष आपके और आपके पूरे परिवार के लिए सुख समृद्धि का वर्ष हो।

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