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Sunday, November 21, 2021

सलमान ने किया हिंदुओं का अपमान



-- Arun Kumar Singh (@arungodda)
 
हम सनातन धर्मी जितने सहिष्णु हैं, उतने इस दुनिया में और किसी मत-पंथ के लोग नहीं हैं। इसका एक बड़ा प्रमाण है सलमान खुर्शीद प्रकरण। खुर्शीद ने अपनी पुस्तक "Sunrise Over Ayodhya" में हिंदुत्व की तुलना आतंकवादी संगठन बोको हराम और अन्य आतंकवादी संगठनों से की है। 

हिंदू धर्म और हिंदुओं का इससे बड़ा और कोई अपमान नहीं हो सकता। सलमान ने यह बहुत बड़ा अपराध् किया है। उनके इस अपराध् को किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। सलमान यदि ऐसी बात अपने मजहब इस्लाम के लिए करते तो अब तक उनके सरकलम का पफरमान निकल गया होता। उन्हें अपनी जान बचाने के लिए सलमान रुश्दी की तरह लंदन या और कहीं गैर-इस्लामी देश के लिए भागना पड़ता। वे भाग्य मनाएं कि उन्होंने हिंदू धर्म के लिए ऐसी बातें की हैं। इसलिए उनके सरकलम का फरमान जारी नहीं हुआ है और वे चैनलों में बेशर्मी के साथ कुतर्क भी कर रहे हैं। यदि सच में हिंदू बोको हराम के आतंकवादियों की तरह होते तो वे चैनलों में कुतर्क भी नहीं कर पाते। इतने सहिष्णु धर्म की तुलना उन्होंने उन आतंकवादियों से की है, जो बात-बात में किसी की भी हत्या कर देते हैं। यही नहीं, चुपके से कहीं बम पफोड़कर निर्दोष लोगों को मारते हैं। सलमान जरा बताएं कि किस हिंदू ने कहाँ बम पफोड़कर किसी की हत्या की है! 

वास्तव में देखा जाए तो सलमान खुर्शीद जैसे लोग हिंदुओं की सहिष्णुता का ही दुरुपयोग कर रहे हैं। दरअसल, ऐसे लोग ही इस देश और यहाँ के बहुसंख्यक समाज के लिए खतरा हैं। ऐसे लोग चाहे किसी भी पद पर रह लें, इनके अंदर का वह विषाणु कभी नहीं मरता है, जो सदियों से इनमें छिपा है।  

जो हिंदू अपने देवी-देवताओं के मंदिरों के ध्वंस पर भी कभी सड़कों पर नहीं उतरे, उन्हें वे सलमान ‘आतंकवादी’ बता रहे हैं, जिनके हम-मजहबियों ने त्रिपुरा की एक फर्जी खबर के आधार पर पिछले दिनों देश के कई हिस्से में दंगे किए। गृह मंत्रालय बार-बार कह रहा है कि त्रिपुरा में कोई मस्जिद नहीं तोड़ी गई है। इस संबंध् में सोशल मीडिया में फर्जी फोटो और गलत समाचार चलाए जा रहे हैं। यह पता चला है कि इस फर्जी फोटो को कुछ जिहादी तत्वों ने ही कई फोटो को जोड़कर बनाया था। यानी इन्हीं लोगों ने दंगे करने के लिए फर्जी फोटो तैयार किया था। लेकिन सलमान ने इन दंगाइयों के लिए एक शब्द नहीं बोला। 
सलमान को यह बताना जरूरी है कि आज दुनियाभर में जहाँ भी आतंकवादी घटनाएँ हो रही हैं, उनके पीछे सलमान के हम-मजहबी ही हैं। सलमान के हम-मजहबियों ने ही कश्मीर घाटी से लगभग 5,00,000 हिंदुओं को खदेड़ दिया है। वे हिंदू आज भी विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इसके बावजूद हिंदुओं ने भारत के किसी भी हिस्से में ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कि किसी को विस्थापित होना पड़े। इसके बावजूद सलमान हिंदुओं को ‘आतंकवादी’ बता रहे हैं। सलमान के हम-मजहबियों ने ही अनेक बार सोमनाथ मंदिर को तोड़ा। टूटी हुई अवस्था में ही सोमनाथ मंदिर सैकड़ों वर्ष तक पड़ा रहा। इसके बावजूद कभी किसी हिंदू ने किसी मजहब के पूजास्थल को नहीं तोड़ा। आज भी मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर चीख-चीख कर बता रहा है कि मुसलमान शासकों ने हिंदुओं के साथ क्या किया है। उनके मंदिरों को तोड़कर जबरन मस्जिदें बना दी गई हैं। इसके बावजूद हिंदू सब कुछ सहन कर रहे हैं और इनका कानून के तरीके से हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इसी तरीके से श्रीराम जन्मभूमि पर आज भव्य मंदिर बन रहा है। हिंदू कभी हिंसा नहीं करता है। इसके बावजूद सलमान ने हिंदुओं की तुलना आतंकवादियों से की है। 

जिन सलमान ने कभी किसी इस्लामी आतंकवादी घटना की निंदा तक नहीं की है, वे हिंदुओं को ‘आतंकवादी’ बता रहे हैं। जो सलमान बाटला हाउस में पुलिस अध्किारी मोहनचंद शर्मा की हत्या करने वालों को ‘निर्दोष’ मुसलमान कहते हैं, वे उन हिंदुओं को ‘आतंकवादी’ बताते हैं, जो एक चीटी के लिए भी चीनी डालते हैं। 
सच में देखा जाए तो सलमान खुर्शीद ने इस पुस्तक के माध्यम से अपने जैसे अन्य सफेदपोश ‘जिहादियों’ के बुर्के उतार दिए हैं। इस व्यक्ति के नाना ;जाकिर हुसैनद्ध को भारत के लोगों ने अपना तीसरा राष्ट्रपति बनाया था। इनके पिता खुर्शीद आलम  केन्द्रीय मंत्री और राज्यपाल रहे। ये स्वयं विदेश मंत्री सहित कई बार मंत्री रहे। लेकिन न तो इनकी कृतघ्नता कम हुई, न जिहादी मानसिकता। 
देखा जाए तो सलमान जैसे लोग कलम जिहादी हैं। इनमें से अध्कितर न्याय-अन्याय, उचित-अनुचित का विचार नहीं करते और ‘उम्मा’ यानी ‘इस्लामिक भाईचारे’ की धरणा को पोषित करते हैं। ये कलम के जिहादी तलवार और बंदूक वाले जिहादियों से अध्कि खतरनाक हैं।

देश के विभाजन की नींव ऐसे ही कलम जिहादियों ने रखी थी। द्विराष्ट्रवाद का सिद्धांत मुख्यतः सर सैयद अहमद द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसे आधुनिक भारत/पाकिस्तान के इतिहास में मुसलमानों द्वारा सबसे अधिक सम्मान दिया जाता है। सर सैयद अहमद द्वारा प्रतिपादित किए गए द्विराष्ट्रवाद सिद्धांत को अली भाइयों ;शौकत अली जौहर और मोहम्मद अली जौहरद्ध ने आगे बढ़ाया। इन दोनों को भारत की आजादी से कुछ ज्यादा लेना-देना नहीं था। इनकी मुख्य परेशानी यह थी कि तुर्की के खलीफा की खिलाफत नहीं जानी चाहिए और तुर्की को दुनियाभर के मुसलमानों का मजहबी नेता माना जाना चाहिए। जबकि प्रथम विश्व युद्ध के बाद मुसलमानों और खासतौर से तुर्की की जो भूमिका रही थी उससे अंग्रेज बहुत नाराज थे। उस समय दुनिया की सबसे बड़ी ताकत होने के कारण अंग्रेज तुर्की के खलीफा के पद को समाप्त कर देना चाहते थे।

अली भाई द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत को आगे बढ़ाने में सबसे आगे थे। हालांकि देश विभाजन के पहले ही इनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन यही लोग थे जिन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को इंग्लैंड से वापस बुलाकर मुस्लिम लीग का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया था और पाकिस्तान बनाने के लिए उकसाया था। 
राजनीतिक क्षेत्रा में मोहम्मद अली जिन्ना और आध्यात्मिक तथा बौद्धिक तौर पर अल्लामा इकबाल जैसे मुस्लिम बुद्धिजीवियों की भूमिका सबको पता है। अल्लामा ने पाकिस्तान बनाने की सैद्धांतिक , मजहबी और बौद्धिक नींव रखी, जबकि मोहम्मद अली जिन्ना ने उस पर महल खड़ा किया जिसे हम आज पाकिस्तान कहते हैं।
ये कलम के जिहादी दिखावे के लिए पंथनिरपेक्ष रहते हैं। वास्तव में ये लोग कभी पंथनिपरपेक्ष हो ही नहीं सकते। इसके उदाहरण हैं मुस्लिम देश, जहाँ पंथनिरपेक्षता का ‘प’ भी नहीं है। भारत इसलिए पंथनिपरेक्ष है कि यहाँ हिंदू बहुसंख्यक हैं। इन कलम जिहादियों का मुख्य उद्देश्य दारुल इस्लाम ही रहता है। इसलिए चाहे सलमान खुर्शीद हों, जावेद अख्तर हों या हामिद अंसारी ये सभी पंथनिरपेक्षता की आड़ में भारत को दारुल इस्लाम में बदलने में लगे हैं। हामिद अंसारी को देश ने राष्ट्र के दूसरे सर्वाेच्च संवैधनिक पद यानी उपराष्ट्रपति के पद पर बिठाया, वह भी लगातार 10 साल तक। लेकिन जब तक यह व्यक्ति उस पद पर बैठा रहा तब तक यह मुसलमानों की हिमायत करता रहा और हटने के बाद उसने कहा, ‘‘भारत में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं और यह देश रहने लायक नहीं है।’’ 
हिंदुओं को पंथनिरपेक्षता का ज्ञान देने वाले इन कलम जिहादियों ने कभी उन तालिबानियों की निंदा तक नहीं की, जिनमें मानवता नाम की तो कोई चीज ही नहीं है। जो तालिबानी बात-बात पर मुसलमानों की ही हत्या कर रहे हैं, वे लोग इन कलम जिहादियों के लिए मुजाहिदीन यानी इस्लाम के लड़ाके हैं। इसलिए उनकी निंदा तक नहीं करते हैं और जो हिंदू पशु-पक्षी तक की हत्या को महापाप मानते हैं, उन्हें ये लोग ‘आतंकवादी’ कहते हैं। यदि इनमें थोड़ी भी शर्म होती तो ऐसी बातें नहीं करते। हिंदुओं के पास एक ही रास्ता है कि इन कलम जिहादियों को अध्कि से अध्कि बेनकाब किया जाए, ताकि इनका असली चेहरा देश के सामने आता रहे।

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