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Thursday, April 4, 2019

कंपनी बड़ी है तो क्या हुआ यहां कोई काम लिखित नहीं मौखिक होता है

रामगढ़ में केपीटीएल मुंबई के कर्मचारी उत्पीड़न का गंभीर मामला

रामगढ़ में कर्मचारी उत्पीड़न से संबंधित मामला प्रकाश में आया है। सौरभ कुमार शर्मा जो कल्पतरू पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड में कार्यरत थे , उनके अनुसार कंपनी के उच्च पदाधिकारियों द्वारा उनसे 3 महीने तक बिना किसी बेतन के काम लिया गया और वेतन मांगने के बाद उन्हें कंपनी छोड़ देने की बात कही गई। कल्पतरू पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड मुंबई की प्रतिष्ठित कंपनी है जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एल्बम बांबे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है।

कल्पतरू पावर ट्रांसमिशन को गेल के माध्यम से भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत गैस पाइपलाइन का काम मिला हुआ है जिसके तहत कंपनी को बोकारो से लेकर उड़ीसा के अंगुल तक गैस पाइप लाइन बिछाया जाएगा। इस काम को सुचारू ढंग से चलाने के लिए रामगढ़ में स्थानीय कार्यालय का निर्माण किया गया। इस कार्यालय के तहत लगभग 150 से ज्यादा की संख्या में कर्मचारियों को नियुक्त किया गया। उन्हीं में से एक कर्मचारी जिनका नाम सौरभ कुमार शर्मा है जिन्हें लाइजनिंग ऑफिसर के लिए रखा गया था। उन्होंने बताया कि इस कार्यालय में उनकी नियुक्ति दिसंबर के माह में की गई थी जिसके तहत उन्हें ₹40000 मासिक वेतन का वादा किया गया था। सौरभ के अनुसार उन्हें किसी भी प्रकार की नियुक्ति पत्र नहीं दी गई और उनके बार-बार नियुक्ति पत्र मांग करने के बाद उन्हें 3 महीने के बाद नौकरी से छोड़ने को कह दिया गया। उसके बाद उन्होंने अपने वेतन की मांग की तो उनके साथ बदतमीजी और धमकी दी गई साथ ही धक्के देकर कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया। कंपनी की तरफ से सौरव शर्मा को रहने के लिए आवास की व्यवस्था की गई थी उस आवास पर भी उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका सामान सर्टिफिकेट रख लिया और वहां से भी मार पीट कर भगा दिया गया। काफी परेशान होकर अंत में न्याय की गुहार लेकर रामगढ़ के उपायुक्त राजेश्वरी बी , रामगढ़ पुलिस अधीक्षक कार्यालय एवं रामगढ़ थाना में आवेदन दिया गया । उसके बाद जब सौरभ शर्मा अगले दिन कार्यालय गए तो उन्हें वहां पर एचआर डिपार्टमेंट के अधिकारी उमेश चौहान से बात करने को कहा गया, अपनी बात रखने के बाद सौरव शर्मा को सुरेश चंद्रा एवं उमेश चौहान ने अपनी नाराजगी जताई और उनसे कहा कि वे पुलिस अधिकारियों के पास गए थे इसलिए अब उन्हें नियुक्ति पत्र एवं बकाया राशि के लिए पुलिस अधिकारी के पास ही जाएं साथ ही अधिकारियों ने किसी भी तरह की कोई सुनवाई नहीं की एवं उन्हें धमकी दी गई की अगर वह दुबारा ऑफिस में नजर आते हैं या कहीं और शिकायत करते हैं तो उनकी खैर नही।

सौरव शर्मा ने बताते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र नहीं देने के एवज में उनके उच्च अधिकारी सुरेश चंद्रा , उमेश चौहान एवं रणविजय सिंह ने कहा कि इस कार्यालय में किसी को नियुक्ति पत्र नहीं दी जाती है एवं सारे काम मौखिक किए जाते हैं, इसीलिए आपको भी किसी प्रकार का कोई नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाएगा। सौरभ शर्मा के अनुसार यहां के सभी कर्मचारियों को रोजाना 12 से 16 घंटे काम कराया जाता है एवं सप्ताह के किसी भी दिन कोई छुट्टी नहीं दी जाती है ।

भारत सरकार के द्वारा किसी भी कर्मचारी के साथ किसी भी प्रकार का कोई अन्याय ना हो इसके लिए कई धाराएं लागू की गई है मगर उन धाराओं का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है और इस तरह के उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने की सख्त जरूरत है।

रिपोर्ट: रितेश कश्यप

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