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Monday, December 3, 2018

आज का युवा पीढ़ी और नशे की जद








भुरकुंडा :नशे का मतलब होता है आदमी अपने होश खो बैठे और बेखुदी मे चला जाये। अपने आपके गुम हो जाने का नाम ही नशा है। ऐसे ही नशे की लत हमारे देश की युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है। यह वर्ग वह वर्ग होता है जिसमे 12 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक के लोग शामिल होते हैं। किसी भी देश की प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण है वहां की युवा पीढ़ी। गौरवतलब है कि भारत संपूर्ण विश्व में सबसे युवा आबादी वाला देश है। वही रामगढ जिला सहित पुरे कोयलांचल मे युवा पीढ़ी किसी न किसी नशे के जद में मालूम पडती नजर आ रही है। नशा करना आज के इस दौर में मानो फैशन हो गया है। वही नशे से संबंधित कारोबार करने वाले लोगो का धंधा भी जोरों पर चल रहा है। आये दिन आप भुरकुंडा हाई स्कूल के पीछे, झाडियों के मंडेर मे, किसी अज्ञात जगह हमारे देश के युवा पीढ़ी को नशा करते देखा जा सकता है। महज इस नशे के गति मे आज हमारे स्कूल मे पढने वाले बच्चों को भी अपने जद मे ले लिया है। सुबह सुबह यह मंजर आपको हाईू स्कल के पीछे बंद पडी आपन कास्ट कोलियरी के झाडियों में, गांधी हाई स्कूल के पीछे, मस्जिद कालोनी के पीछे, काल कम्पनी के बंद पडे आवासों मे देखने को मिल जायेगी। महज नशे की लत मे ये इतने मसगूल हो जाते है कि अपने ही घर के सामान व रुपयों को चुराकर बाजार मे सस्ते दामों में बेच देते है। इसके आदि खास कर समाज के निचले तबके के बच्चे होते है जिसके माता पिता पेट की आग बुझाने के लिय सुबह ही घर से निकल जाते है और देर रात या कभी कभी नही भी। इनके आने जाने का कोई समय नही होता। और तो और ये स्वंय भी नशा करते है तो महज ये बच्चे क्यो पीछे रहे। वही नशे की जहोजद धीरे धीरे इन्हे समाज के गंदे कार्यो के नुमाईसो से संपर्क करा देते है जहां दारू, जुआ, अयासी महज एक आदतें शौक का रुप ले लेती है। और उनके माता पिता द्वारा देखे गये सपनों की मययत जिते जी निकल जाती है। महज यह कहना गलत नहीं होगा कि इसके पीछे हमारे समाज, प्रशासन दोषी नही है। खुलेआम आज हमारे कोयलांचल में कई जगह बोतल मोड, सयाल मोड, पटेल नगर, भुरकुंडा बाजार जहां नकली शराब, गांजा का धंधा, खुले आम होटलों मे दारू का परोसा जाना, भुरकुंडा व कई जगहो पर खुलेआम बेधड़क महुआ शराब का अड्डा होना आम बात है। वही प्रशासन की अनदेखी का मलाल यहां की युवा पर भारी मालूम होती दिखाई देती है। कोयलांचल मे कई जगह जुआ का लम्बा दाव चलता है लेकिन प्रशासन का शिकंजा इन तक नही पहुंच पाता। महज खानापूर्ति हेतु छोटे छोटे बरसाती मंजर पर शिकंजा कस कर वाहवाही लूट ली जाती है और मेडल ले लिया जाता है। क्या कारण है कि महज पुरे पतरातू प्रखंड में दो ओपी व एक थाना होने के बावजूद हमारी प्रशासन ईन मनचलो पर शिंकजा नही कस पा रही है। यदि हम आकडो की बात करे तो चाइल्ड लाइफ इंडिया फाउंडेशन 2016 के मुताबिक देश मे 70%युवा नशे की गिरफ्त में है। आजकल कोयलांचल में गांजा का धंधा अपने उपरी चरम पर है। कोयलांचल के कई जगहो से गाजा की सप्लाई, अवैध दारू की सप्लाई बंद दरवाजे की पीछे से होती है।वही महुआ दारू का अवैध कारोबार तो मानो कोयलांचल मे हर जगह खुलेआम युवा पीढ़ी को अपने जेहन में ले रहा है। बच्चे इस कदर नशे की जद में समाते जा रहे है कि बाजार में मिलने वाला भांग वाली गोली, गुटखा, सिगरेट, तम्बाकू, सनराईज डैनडराईट को सूंघ कर मौत को दावत देते कही भी देखे जा सकते हैं। वही समाज कल्याण विभाग हाथ मे हाथ दिये बैठा है और निरक्षण के दौरान केवल निर्देश मात्र ही परिणाम निकल कर आता है। क्या हमारे युवा पीढ़ी इसी तरह मौत के आगोश में समाते चले जायेंगे और हमारा संबंधित विभाग यूंही मुख दर्शक बने देखता रहेगा। कब इन खुले आम मौत के सौदागरों पर विभाग का शिंकजा कसेगा। कब हमारी आने वाली पीढी एक नये मिशन के लिये अपने युवा पीढ़ी को इस गिरफ्त से मुक्त करवा पायेगी। कब सरकार से लगाये गये उम्मीदों पर सरकार खरा उतरेगी। इनसब मुद्दों के बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब सरकार स्वंय दारू बेचेगी। देश की युवा पीढी के लिये सरकार ने कोई ब्यवस्था नही सोची लेकिन केवल राजस्व हेतु जहर के धंधा पर ब्यवस्थापक का किरदार जरूर निभा रही है। हद हो गयी सरकार के घिनौने कार्य की जो बंद होने चाहिये उसे सरकारी तंत्र मे शामिल कर ब्पयपार के साथ जोड रही है। नकली शराब पर शिकंजा कस सके व दारू की दलाली ना हो इसके लिये सरकार ने हर सरकारी दुकान पर अपने आदमी डिपुट कर दी है। वही हर पंचायत के मुखिया और थाना प्रभारी को इस बाबत विशेष जागरूक रहने की उम्मीद की गयी है। अब तो यह कुछ समय के बाद ही पता चलेगा कि कौन प्रशंसा का पात्र बनता है और कौन आलोचना का। वही इस सिस्टम से आस लगाये लोगो को भी समय अब उस समय का इंतजार है।

लेख : रॉकी अग्रवाल








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