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Friday, November 16, 2018

क्या “विदूषक’ के दायरे से भी आगे निकल चुके हैं ‘युवराज’

क्या “विदूषक’ के दायरे से भी आगे निकल चुके हैं ‘युवराज’ -  अरुण जेटली


क्रिमिनल लॉ की प्रैक्टिस करने वाले ज्यादातर वकील अपने शुरुआती पेशेवर करिअर में अपने वरिष्ठों से सलाह लेते थे। वरिष्ठ उन्हें सलाह देते थे कि अगर आप तथ्यों को लेकर मजबूत हैं तो तथ्यों पर जोर दीजिए, अगर आप कानूनी पहलू से मजबूत हैं तो कानून पर जोर दीजिए, लेकिन अगर आप दोनों में कमजोर हैं तो डेस्क पर ही जोर-जोर से हाथ मारिए। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी के सलाहकार उन्हें ये समझा चुके हैं कि आपके लिए सिर्फ तीसरा विकल्प  ही बचता है। लेकिन डेस्क पीटना ही काफी नहीं होता है इसके साथ कुछ नई बातें भी कहनी पड़ती हैं। अगर तथ्यपूर्ण बातें कहना आपके हित में नहीं है तो वो मनगढ़ंत बातें तैयार कीजिए। मनगढ़ंत और बेबुनियाद बातों को दर्जनों बार दोहराइए और फिर खुद को समझाइये कि दरअसल झूठ ही सच है।  इसके बाद आप आराम से भ्रम की दुनिया में रह सकते हैं। या ये भी हो सकता है कि ये झूठ फैलाने की सोची-समझी साजिश हो।

 

अब ये मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उन बातों के पक्ष में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करूं जो मैंने कही हैं। राहुल गांधी के भाषण और ट्वीट्स में इस तरह के उदाहरण भरे पड़े हैं। मैं ऐसे पांच उदाहरण पेश करता हूं।

 

पहला, वो बार-बार कहते हैं कि देश के निजी उद्योगपतियों को 38,000 करोड़ से लेकर 1,30,000 करोड़ तक का फायदा पहुंचाया गया है। आगे वो तर्क देते हैं कि जिस चीज को एचएएल से बनवाया जाना चाहिए था उसे अब ऐसी निजी कंपनी से बनवाया जा रहा है जिसके पास उसे बनाने का कोई अनुभव नहीं है।

 

सच क्या है- राफेल एयरक्राफ्ट और उसके हथियार भारत में बनाए ही नहीं जा रहे हैं, न तो डसॉल्ट एविएशन के द्वारा और ना ही किसी निजी कंपनी के द्वारा। सभी 36 राफेल एयरक्राफ्ट्स और उसमें इस्तेमाल होने वाले हथियार तैयार हालत में भारत पहुंचेंगे। राफेल की आपूर्ति शुरू हो जाने के बाद डसॉल्ट को भारत में कॉन्ट्रैक्ट की कुल रकम के 50 फीसदी के बराबर खरीदारी करनी होगी। ये करार यूपीए सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम को प्रोत्साहन देने के मकसद से किया गया है। अगर कुल डील 58,000 करोड़ की है तो उसका 50 फीसदी 29,000 करोड़ होगा। डसॉल्ट को जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति 120 ऑफसेट सप्लायर करेंगे और जिस बिजनेस हाउस का नाम बार-बार लिया जा रहा है वो उन 120 सप्लायर्स में से एक है। डसॉल्ट ने कह दिया है कि उस बिजनेस हाउस के जिम्मे कुल कॉन्ट्रैक्ट का सिर्फ तीन फीसदी हिस्सा ही जा सकता है जो 1000 करोड़ से भी कम का होगा।

 

दूसरा, ये बात बार-बार कही जा चुकी है कि जब किसी खाते को एनपीए घोषित कर दिया जाता है तो उसकी देनदारी को भी खत्म मान लिया जाता है। बावजूद इसके वो एक बात बार-बार कहते हैं कि मोदी जी ने अपने 15 दोस्तों का कर्जा माफ कर दिया।

सच क्या है- ये लोन यूपीए के शासनकाल में दिए गए। एक रुपया भी किसी का माफ नहीं किया गया है। डिफॉल्टर कंपनियों के प्रमोटर्स के खिलाफ आईबीसी के तहत कार्रवाई की गई है और बैंक इसके जरिए अपने लोन की सफलतापूर्वक रिकवरी कर रहे हैं। बैंक एनसीएलटी प्रक्रिया के तहत अपने लोन की रिकवरी कर रहे हैं।

 

तीसरा, उन्होंने एक रटा-रटाया सवाल सीख लिया था कि भारत में मोबाइल फोन का निर्माण क्यों नहीं किया जा सकता? मैंने उन्हें समझाया कि जब यूपीए सत्ता से बाहर हुई, तब यहां मोबाइल फोन और उससे जुड़े उपकरण बनाने वाली केवल दो यूनिट्स थीं। आज इनकी संख्या 120 है और उनका विस्तार हो रहा है। तब उन्होंने अपने उदाहरण बदल लिए। अब वे जहां भी भाषण देते हैं, वहां लोगों से यही कहते हैं कि उनके जिले में जूते क्यों नहीं बनते। वे कितने अनजान हैं- भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा जूता उत्पादक देश बन चुका है। प्रति वर्ष हम लगभग 20,000 करोड़ रुपये का जूता निर्यात करते हैं। भारत के जूता उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक प्रकृति का एहसास करने के लिए उन्हें सिर्फ दिल्ली से सटे बहादुरगढ़ तक ही जाना है।

 

चौथा, जीएसटी को लेकर वो कहते हैं कि ये दोषपूर्ण है और इसमें बदलाव की जरूरत है। भारत वो देश है जिसने जीएसटी को सबसे सफलतापूर्वक लागू किया। पूरा  देश एक बाजार बन गया है और इसके लागू होने के बाद देश के सारे चेक-प्वाइंट्स समाप्त हो गए। इंस्पेक्टर्स अब दिखाई नहीं दे रहे और इनकम टैक्स की तरह जीएसटी रिटर्न भी ऑनलाइन फाइल किया जा रहा है। ज्यादातर मूल्यांकन भी ऑनलाइन ही होंगे। कांग्रेस शासित राज्यों समेत देश के सभी राज्यों ने इसके मॉडल और रेट को स्वीकार किया। पहले 13 महीनों में ही 334 वस्तुओं के संदर्भ में कांग्रेस के 31% टैक्स वसूली सिस्टम (एक्साइज+वैट+सीएसटी) को कम करके 18% और 12%  कर दिया गया। इससे महंगाई पर काबू पाने में भी मदद मिली है। ऐसा लगता है कि इस सच से वो नावाकिफ हैं।

 

राहुल की ताजा मनगढ़ंत कहानी

 

पांचवां, कल, मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग कार्यक्रमों में उन्होंने अपने दो भाषणों में मेरे दो संदर्भ दिए। मैं उनके भाषणों के क्लिप को जोड़ रहा हूं, जिस तरह सोशल मीडिया में दिखाई दिए हैं। पहली क्लिप में वह कहते हैं कि मैंने यह स्वीकार किया है कि मैं संसद में विजय माल्या से मिला था। वह आगे दावा करते हैं कि, मैंने यह भी स्वीकार किया है कि माल्या ने मुझसे कहा कि वह लंदन भाग रहा है और मैंने भगाने में उसकी मदद की। दूसरे भाषण की क्लिप में वह कहते हैं कि मैंने स्वीकार किया है कि नीरव मोदी ने भी मुझसे संसद में मुलाकात की थी। उन्होंने दावा किया कि मैंने यह भी स्वीकर किया कि नीरव मोदी मुझसे मिला था और कहा था कि वह देश से बाहर जा रहा है और मैंने भागने में उसकी भी मदद की।

 

सच क्या है-  मुझे याद नहीं है कि मैंने अपने जीवन में कभी नीरव मोदी को देखा भी है। ऐसे में संसद में उसके साथ मुलाकात का सवाल ही पैदा नहीं होता है। अगर वह संसद में आया था, जैसा कि राहुल गांधी दावा करते हैं, तो रिसेप्शन के रिकॉर्ड में यह दर्ज होगा।  राहुल गांधी जी, मैंने कहां पर यह सब स्वीकार किया है?

 

संसद सदस्य के रूप में विजय माल्या एक बार संसद के गलियारे में मेरा पीछा करते हुए आए थे और अपने केस की चर्चा की थी। मैंने उनकी बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उनसे कहा कि अपने प्रस्ताव को बैंकरों के पास ले जाएं। इसी को वह एक मीटिंग बताते हैं और ये कहानी गढ़ते हैं कि उन्होंने(माल्या) मुझसे कहा था कि वह लंदन भाग रहे हैं। यह सरासर झूठ है।

 

वह इस तरह की झूठी कहानी गढ़ते कैसे हैं?  

 

हिंदुस्तान टाइम्स समिट में उन्होंने मेरे साथ एक मीटिंग का संदर्भ दिया था और मेरे लिए इसी तरह की बात कही थी। जब मुझसे पूछा गया तो मैंने कहा था, ‘मैं कोरी कल्पनाओं का जवाब नहीं दे सकता हूं। ऐसे मामलों में मैं राष्ट्रपति मैक्रों की लाइन से सहमत हूं’। आज मुझे लगता है कि यह बात कोरी कल्पना से भी कहीं आगे की है। क्या यह उनके व्यक्तित्व का दोष है, जिसकी वजह से वह एक दर्जन बार झूठ बोलते हैं और फिर खुद ही सोच लेते हैं कि यही सच है,  या फिर क्या यह एक ऐसे  विदूषक युवराज  का मामला है, जो विदूषक के दायरे से भी कहीं आगे निकल चुका है।

-अरुण जेटली

(लेखक केंद्रीय वित्त मंत्री हैं।)

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